अरविंद केजरीवाल: राजनीति का अभिमन्यु

जनता का भरोसा जब संस्था, सरकार या फिर किसी स्थापित व्यवस्था से उठ जाता है ।तो वह एक क्रांति का स्वरूप ले लेता है इस बात का सबसे उत्तम उदाहरण है वर्ष 2012 में अन्ना हजारे का आंदोलन जब जनता का कांग्रेस के प्रति आक्रोश सड़कों पर नजर आया थाजनता ने जिस बात पर अपना आक्रोश प्रतीत किया था भारत में लोकपाल को स्थापित करने से था लेकिन यह मात्र प्रतीक था कारण कुछ और था जनता बेरोजगारी महंगाई और भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी थी भारतीय समाज का प्राचीन काल से ही स्वभाव नेतृत्व के लिए किसी व्यक्ति पर निर्भर रहती है जनता को अन्ना हजारे के रूप में महात्मा गांधी का स्वरूप नजर आया उनके सैनिक पृष्ठभूमि और सामाजिक कार्यों से जनता मोहित हो गई एक विशाल आंदोलन का स्वरूप ले लिया जनता के इस आक्रोश ने,

Published by Saurabh sharma

MSc (physics) Bloger .UPSC aspirant . future politician.

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