अरविंद केजरीवाल = भारतीय राजनीति का “अभिमन्यु”

जब किसी समाज का स्थापित व्यवस्था से विश्वास उठ जाता है। और उसकी रोजमर्रा के कार्यों में होने वाली कठिनाई के लिए समाज के समस्त लोगों द्वारा एक ही विषय को जिम्मेदार ठहराया जाता है। तो यह स्थिति एक क्रांति को जन्म देती है ,भारत में वर्ष 2012 में ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई जब भारत की केंद्र सरकार से लोगों मैं निराशा और भविष्य के प्रति नकारात्मक भाव पैदा हुआ, जनता ने प्रतीकात्मक रूप से भ्रष्टाचार को अपने आक्रोश को व्यक्त करने के लिए चुना , लोगों को अन्ना हजारे के रूप में अपना नेतृत्वकर्ता दिखाई दिया । अन्ना की सैनिक पृष्ठभूमि और सामाजिक कार्यों से लोगों में उनके प्रति आदर का भाव उत्पन्न हुआ । इसी आंदोलन में जन्म हुआ, एक ऐसे नेता का जिसने अपने जीवन के आरंभिक काल में भारतीय राजस्व सेवा में कमिश्नर के रूप में कार्य किया और स्वच्छ छवि के प्रशासनिक लोक सेवक के रूप में अपनी जगह बनाई , अन्ना हजारे के आंदोलन के अंतिम समय में अरविंद केजरीवाल ने लोगों के सामने विकल्प के रूप में एक नई पार्टी को प्रस्तुत किया । जिसका नाम उन्होंने आम आदमी पार्टी रखा अन्ना के आंदोलन के कई साथी जो कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन संस्था में उनके सहयोगी थे। उनके साथ आए दिल्ली विधानसभा 2013 में इस पार्टी ने चुनाव में भाग लिया जनता ने विकल्प के तौर पर इस पार्टी को चुना, अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद के लिए नामांकित किए गए जिस पार्टी के विरुद्ध भ्रष्टाचार के लिए संघर्ष करते उन्होंने चुनाव जीता उसी पार्टी का साथ लेकर उन्होंने सरकार बनाएं और 49 दिन के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के चलते उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया । स्वयं को देश के स्तर का नेतृत्व समझने की भूल के चलते उन्हें लोक सभा 2014 के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा वह स्वयं प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विरुद्ध वाराणसी से चुनाव लड़ रहे थे । लेकिन उन्होंने स्वयं को भारतीय राजनीति में विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया यही उनकी दीर्घकालीन जीत थी 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने फिर से भाग लिया इस बार उन्होंने जनता से माफी मांगी और 5 साल निरंतर दिल्ली के विकास के लिए कार्य करने के लिए वोट मांगे जनता परंपरागत पार्टियों के भ्रष्टाचार और कुशासन के चलते विकल्प को आजमाने के लिए तैयार थी जनता ने 2015 में श्रीमान केजरीवाल को अपना अटूट प्यार और समर्थन दिया और उन्होंने 70 सदस्य विधानसभा में 67 आम पार्टी के सदस्य निर्वाचित हुए केजरीवाल ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को जागृत रखा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निरंतर प्रहार करते रहे किंतु उनका यह दाव पर उल्टा साबित हो ही रहा था वह एकसमझदार राजनीतिक रूप से इस बात को समझ गए और उन्होंने दिल्ली के विकास और दिल्ली के लोगों की भलाई में अपना ध्यान केंद्रित किया दिल्ली में बिजली पानी और स्वास्थ्य अच्छा आदि क्षेत्रों में अच्छा कार्य हुआ केजरीवाल को जनता ने एक इमानदार और कुशल प्रशासक के रूप में स्वीकार किया कानूनी बाध्यताओं और दिल्ली के पूर्ण राज ना होने के बावजूद उन्होंने प्रशंसनीय कार्य किया जनता के सामने एक विकल्प के रूप में केजरीवाल सफल राजनीतिक साबित हुए , 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा के चुनाव में जनता ने उनके परिश्रम का अच्छा फल उन्हें दिया । निरंतर तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में वह शपथ लेने जा रहे हैं यह इस बात को साबित करता है। कि आगामी वर्षों में वह केंद्रीय स्तर पर एक विकल्प के रूप में अवश्य प्रस्तुत होंगे क्योंकि उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी को लगातार दूसरी बार विलुप्त कर दिया । और देश की सबसे बड़ी पार्टी और इस वक्त सबसे ताकतवर नेता नरेंद्र मोदी को परास्त किया जोकि किसी साधारण नेता के द्वारा किया गया, असाधारण कार्य है केजरीवाल की छवि जनता के रूप में एक साधारण व्यक्ति के रूप में है जो कि उनकी सबसे बड़ी ताकत है । विचारधारा के रूप में स्पष्ट ना होने के बावजूद यह पार्टी जनता में बहुत लोकप्रिय है । केजरीवाल भविष्य में कितने बड़े राजनेता साबित होंगे और यह प्रयास कितना सफल होगा या वक्त ही बताएगा?

Published by Saurabh sharma

MSc (physics) Bloger .UPSC aspirant . future politician.

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