आज के आधुनिक भारत में प्रश्न उठता है कि हिंदुत्व क्या है सिर्फ एक धर्म या उस धर्म से भी बढ़कर मनुष्य के जीने का तरीक़ा प्राचीन भारत में आदिकाल से ही मनुष्य के अस्तित्व में आने की एक विशिष्ट पहचान थी उसे लोगों ने धर्म का नाम दिया धर्म अर्थात ईश्वर पर आस्था समर्पण प्रदर्शित करने का एक मार्ग ऋषि-मुनियों ने तपस्या यज्ञ और योग साधना के द्वारा ईश्वर से संपर्क स्थापित करने का मार्ग खोजा जिससे हिंदू धर्म का अविष्कार हुआ हिंदू धर्म कई मार्गों में चलकर विभाजित हुआ उसके कई प्रकार सामने आए वैष्णव धर्म शैव धर्म निरंकारी पंथ अलौकिक ईश्वर आदि आधुनिक भारत की युवाओं को इस बात से अवश्य रूप से परिचित होना चाहिए की सबसे प्राचीन धर्म हिंदू का नाम आधुनिक स्वरूप में दिया गया प्राचीन काल में सिर्फ एक ही प्रथा थी जिसका लोग निर्वहन करते थे सर्वप्रथम ईरान के निवासियों ने सिंधु नदी के तट पर निवास करने वाले मनुष्य की प्रजाति को हिंदू का इसका कारण यह था कि यूनानी भाषा में सा को हा के रूप में उच्चारित किया जाता था हिंदू एक धर्म है और हिंदुत्व एक जीने की पद्धति हिंदुत्व का धर्म से आस्था से किसी भी प्रकार का कोई रिश्ता नहीं है हिंदुत्व विचारों का आदर्शों का एक समावेश है जबकि हिंदू धर्म ईश्वर के प्रति आस्था व्यक्त करने का एक मार्ग हिंदुत्व के मार्ग पर चलकर हम स्वयं का आंतरिक और बाहरी रूप से विकास कर सकते हैं हिंदुत्व कभी किसी धर्म का अपमान करना या फिर किसी धर्म का पालन करने के लिए हमें आदेशित नहीं करता योग हिंदुत्व का ही एक प्रकार है जिसका धर्म जाति संप्रदाय से कोई लेना-देना नहीं हिंदुत्व मानव विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है हिंदुत्व त्याग परिश्रम और सत्कर्म के लिए मनुष्य को अग्रेषित करता है